Parisamvad . . . — 31 Oct 2026, 07:21 CET
Video by Jiva Balance
परिसंवाद की यह बैठक गीता ध्यान से शुरू होती है। फिर प्रतिभागी अपने आध्यात्मिक सप्ताह के बारे में बताते हैं। बिहार से आए एक साधक कार्तिक माह और छठ पूजा के अनुभव सुनाते हैं: नियम और शुद्धता का पालन, नदी घाट की सफाई की सेवा, ठेकुआ प्रसाद, और डूबते व उगते सूर्य को अर्घ्य। अनुराग पुराणों से जुड़ा एक प्रश्न रखते हैं: ध्रुव और राजा ककुद्मी-रेवती की कथाओं में लोकों की यात्रा के समय समय अलग-अलग क्यों बहता है। चर्चा में जवाब आता है कि बाहरी लक्ष्य से भौतिक यात्रा करने पर भौतिक समय लागू रहता है, जबकि भीतर एकाग्र होकर आत्मा या चेतना से जुड़ने पर समय रुक जाता है। इसके साथ तपस्या को एक ही संकल्प पर पूरा ध्यान बताया गया, और यह भी कहा गया कि असुरों का बाहर की ओर संकल्प अंत में उनके विनाश का कारण बनता है। इस बीच इंटरस्टेलर फिल्म, शिव महापुराण और ऑटोबायोग्राफी ऑफ अ योगी का भी ज़िक्र आता है। कविता बताती हैं कि अब वे फल की बजाय कर्म पर ध्यान रख पा रही हैं। इसके बाद सब बारी-बारी से गीता के श्लोक उद्धरेदात्मनात्मानम् और कर्मण्येवाधिकारस्ते गाते हैं, और मार्गदर्शक उच्चारण को बारीकी से सुधारते हैं: संधि, विसर्ग, अनुष्टुप छंद में पदों का विराम, फ और प का अंतर, संगोऽस्त्वकर्मणि में अवग्रह, और द व त जैसे दंत्य अक्षर। अभ्यास का तरीका बताया जाता है कि भेजी गई ऑडियो पहली बार सुनें और दूसरी बार साथ गाएँ। फिर तीसरा श्लोक 9.27 यत्करोषि यदश्नासि शुरू होता है और श, ष व स के अंतर का अभ्यास होता है। अंत में राजविद्या राजगुह्य योग के संदर्भ में इस श्लोक का अर्थ समझाया जाता है: खुद को ऊपर उठाओ, कर्म पर ध्यान दो, और हर कर्म ईश्वर को अर्पित करो। ईश्वर को माता-पिता या बाल गोपाल के रूप में देखने की बात भी होती है। बैठक ब्रह्मार्पणम् और पूर्णमदः की प्रार्थना से खत्म होती है।
- Channel
- Jiva Balance
- Type
- Video
- Published
- 31 Oct 2026
- Categories
- Mind, Soul
About
Parisamvad, meaning a complete dialogue. Here we have fellow students who follow Vedant spirituality in their life under their individual Masters. However, they come together and openly speak to each other and discuss the various different topics that they study under their gurus. You are all welcome to join us on these DEEPLY CONTEMPLATIVE discussion known as Parisamvad...
Topics: कर्मण्येवाधिकारस्ते, संस्कृत उच्चारण, उद्धरेदात्मनात्मानम्, यत्करोषि यदश्नासि, भगवद् गीता
Chapters
- 0:00 गीता ध्यान प्रार्थना और स्वागत
- 2:10 कार्तिक माह और छठ पूजा के अनुभव
- 10:40 पुराणों में लोकों की यात्रा और समय
- 17:24 तपस्या, चेतना और गुरु से जुड़ाव
- 21:50 कर्म पर ध्यान, फल पर नहीं
- 24:00 पहले दो श्लोकों का पाठ
- 32:40 उच्चारण सुधार: संधि और विसर्ग
- 50:50 तीसरा श्लोक: यत्करोषि यदश्नासि
- 58:30 श, ष और स के उच्चारण का अभ्यास
- 1:05:05 श्लोक 9.27 का अर्थ और साधना का क्रम
- 1:12:10 समापन प्रार्थना